Breaking News

कैंसर से बिखरे परिवारों को शासन के संबल से मिला सहारा

हिमांशु जैन
कैंसर से बिखरे परिवारों को शासन के संबल से मिला सहारा
================

खरगोन 15 जून 2020/ खरगोन के दो परिवारों की दास्तानें एक जैसी लगती है। दोनों ही परिवारों में कैंसर ने अपनी जगह बनाई और परिवारों को बिखेरकर रख दिया। कैंसर से उभरने के लिए दोनों ही परिवारों ने अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया। जब उपचार के लिए रूपए नहीं थे, तो किसी ने अपना आशियाना ही गिरवी रख दिया। जबकि एक परिवार ने अपने रिश्तेदारों और मिलनसार लोगों से कर्ज लेकर कैंसर से मुक्ति के बड़े जतन किए, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। दोनों ही परिवारों में आखिरकर अपने प्रियजनों को खोना पड़ा। खरगोन के धोकपुरा निवासी देवकांत पंड्या जिनकी पत्नी सिंधु पंड्या करीब 2 वर्ष तक कैंसर से जुझती रहीं। पति देवकांत ने उनके उपचार के हर संभव प्रयास किए। उपचार के लिए मकान तक गिरवी रखा। वे उनकी धर्मपत्नी का इंदौर के ग्रेटर कैलाश अस्पताल में उपचार कराते रहे। मजदूरी करने वाले देवकांत ने फिर भी हार नहीं मानी और निरंतर डेढ़ वर्ष तक उपचार कराया। आखिरकार डॉक्टरों ने भी उपचार के बाद घर पर पूरा आराम करने की सलाह दी। नवंबर 2019 में सिंधु पंड्या का देहांत हो गया। सिंधु अपने पीछे 5 बच्चों को छोड़कर गई। देवकांत पर अब 22 वर्षीय शक्ति, 19 वर्षीय चंद्रकांता, 16 वर्षीय रानी, 12 वर्षीय युवराज और 6 वर्षीय कल्याणी की जिम्मेदारी है। ऐसे समय में मप्र शासन की संबल योजना के तहत देवकांत को 2 लाख रूपए मिले, जिससे वे अपने चार बच्चों को पढ़ाई में खर्च करना चाहते है, जबकि छोटी बेटी कल्याणी को अपने बड़े भाई को गोद दिया है।
================
प्रधानमंत्री आवास योजना से घर की चिंता से मुक्ति
================

ऐसा ही कुछ गांधी नगर के राठौर परिवार में भी आफत आ खड़ी हुई। यहां 55 वर्षीय विरेंद्र राठौर जो अपनी रोजी-रोटी बस स्टैंड पर गाड़ियां धोकर चलाते थे। उन्हें 2 वर्ष पहले डॉक्टरों ने कैंसर की समस्या बताई। पत्नी आशा राठौर पर जैसे दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा हो, फिर भी हिम्मत नहीं हारी और इंदौर के एमव्हाय अस्पताल के अलावा अरविंदों अस्पताल और बड़ौदा तक के अस्पतालों में उपचार कराया, लेकिन किस्मत के आगे किसका बस चलता है? अक्टूबर 2019 में विरेंद्र पत्नी और अपनी दो लड़कियों को छोड़कर इस दुनियां से चले गए। पत्नी आशा राठौर मास्टर कॉलोनी के शासकीय स्कूल में मध्यान्ह भोजन बनाने के बाद कॉलोनियों के 3-4 घरों में खाना बनाकर अपना घर चलाती है, लेकिन फिर भी उन्होंने अपनी दोनों लड़कियों की पढ़ाई जारी रखीं। आज उनकी लड़कियां खरगोन महाविद्यालय से बीएससी कर रही है। ऐसे समय में शासन की संबल योजना से बहुत बड़ा सहारा मिला है। आशा बताती है कि उनके उपचार के लिए जो कुछ कर्ज लिया था, उसे पूरा करेगी और बचा रूपए बच्चों की पढ़ाई के उपयोग में लाएगी। भला हो भारत सरकार का, जिससे हमारे आशियाने की चिंता दूर हुई। प्रधानमंत्री आवास योजना में हमारा घर बन गया है।

Check Also

बीना-रेलवे-ट्रेक-पर-एक-इंजन-दूसरे-से-भिड़ा,-ट्रेक-पर-एक-के-पीछे-एक-दौड़ने-लगे,-कर्मचारी-भी-पीछे-दौड़े,-ट्रेक-के-एंड-पाइंट-को-उखाड़-फेंका

बीना रेलवे ट्रेक पर एक इंजन दूसरे से भिड़ा, ट्रेक पर एक के पीछे एक दौड़ने लगे, कर्मचारी भी पीछे दौड़े, ट्रेक के एंड पाइंट को उखाड़ फेंका

🔊 Listen to this मध्यप्रदेश के बीना से गुना की तरफ जाने वाले रेलवे ट्रेक …